✎ कराधान विधेयक 2026 विदेशी निवेश बढ़ाने और UPI पर MDR लागू करने हेतु पारित हुआ।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
**कराधान विधेयक लोकसभा से पारित, यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर प्रावधान की अनुमति**
लोकसभा ने गुरुवार को बिना चर्चा के **कराधान और अन्य विधि (संशोधन) विधेयक, 2026** को पारित कर दिया, जो विदेशी पूंजी आकर्षित करने, घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने और विदेशी क्लाउड कंपनियों के लिए डेटा केंद्रों के उपयोग में “प्रक्रिया निश्चितता” प्रदान करने के उद्देश्य से लाया गया था। इस विधेयक में **भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007** में भी संशोधन किया गया है, जिससे सरकार को यूपीआई और रुपे कार्ड भुगतानों पर शून्य-एमडीआर (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) व्यवस्था को बदलने का अधिकार मिलेगा। वर्तमान में, बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को यूपीआई और रुपे डेबिट कार्ड से भुगतान पर कोई शुल्क लगाने की अनुमति नहीं है। प्रस्तावित बदलाव के तहत, केंद्र सरकार अधिसूचना के माध्यम से उन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों या लेन-देन को निर्दिष्ट कर सकेगी, जिन्हें शुल्क-मुक्त रखा जाना चाहिए। यह कदम बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे बैंकों को यूपीआई लेन-देन से राजस्व सृजन का अवसर मिलेगा, जबकि ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा।
इस विधेयक का **एसएससी, आरबीआई ग्रेड बी और बैंक पीओ परीक्षाओं** के लिए विशेष महत्व है, क्योंकि इससे नीतिगत स्थिरता, विदेशी निवेश आकर्षण और डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के विकास जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। विधेयक में विदेशी कंपनियों को इलेक्ट्रॉनिक सामानों के विनिर्माण के लिए 15 वर्ष तक की आयकर छूट देने का प्रावधान भी शामिल है, जो भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए डेटा केंद्रों के उपयोग को सरल बनाने से डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा
स्रोत: Times of India
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