✎ यूपीआई ने भारत में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देकर डिजिटल भुगतान क्रांति लाई है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy
**यूपीआई ने वित्तीय समावेशन को बदला: पूर्व आरबीआई गवर्नर**
पूर्व भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने हैदराबाद में ‘कैशलेस नेशन: हाउ यूपीआई चेंज्ड एवरीथिंग’ नामक पुस्तक के विमोचन के दौरान कहा कि यूपीआई आज एक अपरिहार्य क्रांति की तरह दिखाई दे सकता है, लेकिन यह वर्षों के संस्थागत चुनावों, तकनीकी नवाचार और दृढ़ कार्यान्वयन का परिणाम है। उन्होंने बताया कि यूपीआई सिर्फ एक नया भुगतान उत्पाद नहीं है, बल्कि एक नया भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र है—एक खुली, अंतरसंचालनीय सार्वजनिक अवसंरचना, जिसने वित्तीय समावेशन को बदला है और अभूतपूर्व निजी नवाचार को सक्षम किया है। पुस्तक के लेखक संतनु पॉल और बी. संबामूर्ति ने यूपीआई के उद्गम और भारत के डिजिटल महाशक्ति बनने की कहानी को दर्ज किया है। आईआईआईटी हैदराबाद के निदेशक संदीप शुक्ला ने कहा कि यह पुस्तक भारत के कैशलेस राष्ट्र बनने की यात्रा में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है।
यूपीआई ने दुनिया को भारत की भुगतान तकनीक में वैश्विक नेतृत्व के रूप में देखा है। लेखकों ने एनपीसीआई और आईडीआरबीटी के साथ अपने गहरे जुड़ाव के माध्यम से भारत के भुगतान परिदृश्य में हुए परिवर्तनों को करीब से देखा है। यह तकनीक न केवल आम लोगों के लिए सुलभ हुई है, बल्कि बैंकिंग प्रणाली में भी क्रांतिकारी बदलाव लाई है। आरबीआई ग्रेड बी, बैंक पीओ और एसएससी जैसी परीक्षाओं के लिए यह विषय महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें डिजिटल भुगतान, वित्तीय समावेशन और तकनीकी नवाचार जैसे विषय शामिल हैं, जो वर्तमान में आर्थिक विकास और बैंकिंग क्षेत्र के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।
स्रोत: The Hindu
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