✎ 2014-21 में कांग्रेस से सबसे ज्यादा 177 दलबदलू निकले, जिनमें 84% करोड़पति थे और बीजेपी ने सबसे ज्यादा 173 को शामिल किया।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
2014 से 2021 के बीच राजनीतिक दल-बदल की प्रवृत्ति में तेजी देखी गई, जहां एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे अधिक 177 सांसद-विधायक कांग्रेस छोड़कर अन्य दलों में शामिल हुए, जबकि 173 भाजपा में शामिल हुए। यह प्रवृत्ति लोकतंत्र की स्थिरता और शासन पर प्रभाव डालती है, जो बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र में नियामक दृष्टिकोण और जोखिम मूल्यांकन के लिए प्रासंगिक है। दल-बदल के कारण राजनीतिक अस्थिरता उत्पन्न होती है, जिससे नीतिगत निरंतरता प्रभावित होती है—ऐसी स्थिति बैंकिंग प्रणाली में भी जोखिम उत्पन्न कर सकती है। इसी प्रकार, भाजपा और कांग्रेस जैसे प्रमुख दलों से जुड़े विधायकों-सांसदों के दल-बदल का विश्लेषण शासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही के मुद्दों को उजागर करता है, जो आरबीआई ग्रेड बी एवं एसएससी परीक्षाओं में प्रशासनिक विषयों से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि दल-बदल करने वाले 84% सांसद-विधायक करोड़पति थे, जबकि 62% उम्मीदवार भी इसी श्रेणी में थे। यह आर्थिक असमानता एवं राजनीतिक शक्ति के केंद्रिकरण को दर्शाता है, जो देश के आर्थिक विकास और समावेशी शासन के लिए चुनौती उत्पन्न करता है। बैंकिंग परीक्षाओं में इस तरह के डेटा का विश्लेषण वित्तीय समावेशन, आर्थिक नीति निर्माण और जोखिम प्रबंधन जैसे विषयों के संदर्भ में किया जाता है। इसी प्रकार, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में राजनीतिक अर्थव्यवस्था और शासन संबंधी प्रश्नों में इस रिपोर्ट से प्राप्त अंतर्दृष्टि सहायक सिद्ध हो सकती है, जहां राजनीतिक स्थिरता और पारदर्शिता का सीधा संबंध आर्थिक विकास से होता है।
स्रोत: amarujala.com
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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