✎ तमिलनाडु सरकार द्वारा सामाजिक न्याय सर्वेक्षण कराने के निर्णय से राज्य में जाति-आधारित आँकड़े एकत्रित करने की प्रक्रिया को गति मिलेगी।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
**टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा सामाजिक न्याय सर्वेक्षण कराने का निर्णय कितना महत्वपूर्ण है?**
तमिलनाडु में टीवीके सरकार द्वारा सामाजिक न्याय सर्वेक्षण कराने का निर्णय राज्य में सामाजिक-आर्थिक असमानताओं को मापने और नीति निर्माण में मददगार साबित हो सकता है। यह सर्वेक्षण मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा राज्य स्तरीय स्तर पर आयोजित किया जाएगा, जबकि केंद्र सरकार द्वारा 2027 में होने वाले जनगणना में जाति आधारित गणना भी प्रस्तावित है। इससे सरकार को विभिन्न जातियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का व्यापक आंकड़ा मिल सकेगा, जिससे कल्याणकारी योजनाओं का लक्षित क्रियान्वयन संभव होगा। हालांकि, राजनीतिक दलों के बीच इस मुद्दे पर मतभेद रहे हैं, जहां डीएमके ने जाति जनगणना को सामान्य जनगणना के साथ कराने की मांग की थी, जबकि एआईएडीएमके ने पूर्व में एक आयोग गठित किया था। यह सर्वेक्षण बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे सरकारी नीतियों, सामाजिक न्याय और आर्थिक विकास के पहलुओं पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
इस निर्णय का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इससे तमिलनाडु में जाति आधारित राजनीति को नई दिशा मिल सकती है। राज्य में जाति जनगणना के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण, शिक्षा और रोजगार नीति में किया जा सकता है। बैंकिंग क्षेत्र में भी इस तरह के सर्वेक्षण से सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और वित्तीय समावेशन पर सवाल उठ सकते हैं, जबकि एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं में इस विषय से संबंधित प्रश्न सामान्य जागरूकता अनुभाग में पूछे जा सकते हैं। इस प्रकार, यह सर्वेक्षण न केवल राज्य स्तरीय नीति निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से भी अत्यंत प्रासंगिक है।
स्रोत: The Hindu
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