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अफीम नीति 2026-27: किसानों की निराशा, भाव नहीं बढ़े, नियम कड़े हुए
अफीम नीति 2026-27: किसानों की निराशा, भाव नहीं बढ़े, नियम कड़े हुए — अफीम नीति 2026-27: पट्टा आवंटन प्रक्रिया
आरेख: अफीम नीति 2026-27: पट्टा आवंटन प्रक्रिया

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance

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अफीम नीति 2026-27 के तहत केंद्र सरकार द्वारा अफीम उत्पादकों को बड़ी निराशा हुई है क्योंकि अफीम के भावों में कोई वृद्धि नहीं की गई है, जबकि किसानों की लंबे समय से इसकी मांग चल रही थी। नई नीति में अफीम उत्पादन की औसत सीमा 4.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तय की गई है, जिसके चलते कम उत्पादन वाले किसानों को पारंपरिक चीरा पद्धति से हटाकर केंद्रित पोस्त पुआल (सीपीएस) प्रणाली में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे किसानों की आय पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि सीपीएस प्रणाली में उत्पादन की शर्तें और कठोर कर दी गई हैं। साथ ही, जिन किसानों का उत्पादन 3 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से कम रहा है, उनके लाइसेंस पूरी तरह रद्द कर दिए जाएंगे, जिससे उनकी आजीविका पर संकट उत्पन्न हो गया है।

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इस नीति का सीधा संबंध देश की कृषि अर्थव्यवस्था और राजस्व संग्रह से है, जो बैंकिंग एवं वित्तीय क्षेत्र के लिए भी महत्वपूर्ण है। अफीम उत्पादन से जुड़े लाइसेंसिंग और नियमन में बदलाव से कृषि ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड और ग्रामीण विकास योजनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है, जो बैंकिंग परीक्षाओं जैसे एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और आईबीपीएस के लिए प्रासंगिक है। इसके अतिरिक्त, यह नीति राजस्व विभाग और वित्त मंत्रालय के नीतिगत निर्णयों से जुड़ी है, जो एसएससी और अन्य सरकारी नौकरी परीक्षाओं में सामान्य ज्ञान एवं करेंट अफेयर्स के दृष्टिकोण से पूछा जा सकता है। किसानों की आर्थिक स्थिति और सरकारी नीतियों के अंतर्संबंध को समझना परीक्षा के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।

स्रोत: amarujala.com


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