✎ यूपीआई शुल्क विधेयक व्यापारी से लिया जाएगा, उपयोगकर्ताओं को नहीं, जिससे बैंक और फिनटेक को निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
लोकसभा ने गुरुवार को एक ऐसा विधेयक पारित कर दिया जिसमें सरकार को यूपीआई और रुपे कार्ड लेनदेन पर शून्य-एमडीआर नीति में बदलाव करने का अधिकार दिया गया है। इस बिल के माध्यम से सरकार को मौजूदा कानून में संशोधन करने का अधिकार मिल जाएगा, जो वर्तमान में बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर व्यापारी शुल्क (एमडीआर) लगाने से रोकता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क व्यापारियों पर लगेगा, आम उपयोगकर्ताओं पर नहीं, और इससे बैंकों तथा फिनटेक कंपनियों को नवाचार एवं बुनियादी ढांचे में निवेश करने में मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी बताया कि एनपीसीआई की अगुवाई वाली यूपीआई और सेवाओं संबंधी समिति इस मामले पर आगे निर्णय लेगी, जिसके बाद ही व्यापारी शुल्क लागू किया जाएगा। इस बदलाव के माध्यम से सरकार का उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली को और सुदृढ़ बनाना तथा तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करना है।
यह विषय बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें डिजिटल भुगतान प्रणाली, यूपीआई, रुपे कार्ड और सरकारी नीतियों के बीच के संबंधों पर प्रकाश डाला गया है। परीक्षा में इससे संबंधित प्रश्न राजकोषीय नीति, डिजिटल इंडिया अभियान, आरबीआई की भूमिका तथा भुगतान प्रणाली अधिनियम जैसे विषयों से पूछे जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, इस बदलाव के माध्यम से सरकार द्वारा डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने तथा तकनीकी नवाचार को प्रोत्साहित करने के प्रयासों को समझा जा सकता है, जो वर्तमान में चल रहे डिजिटलीकरण के दौर में अत्यंत प्रासंगिक है।
स्रोत: Times of India
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