✎ टीएमसी के 20 बागी सांसदों की अयोग्यता पर लोकसभा अध्यक्ष का शीघ्र फैसला संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत होगा।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को टीएमसी के 20 बागी सांसदों की अयोग्यता से जुड़े मामले पर लोकसभा अध्यक्ष से जल्द फैसला लेने की उम्मीद जताई है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि दसवीं अनुसूची के तहत चल रही कार्यवाही में समयबद्ध निर्णय आवश्यक है, क्योंकि मामले की प्रकृति ऐसी है जिसमें शीघ्र निपटारा जरूरी है। पीठ ने लोकसभा अध्यक्ष को इस मामले में संविधानिक दायित्वों का पालन करते हुए त्वरित फैसला लेने की याद दिलाई, जबकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया कि अध्यक्ष ने पहले ही नोटिस जारी कर दिए हैं और मामले में कोई असामान्य देरी नहीं हुई है। हालांकि, न्यायमूर्ति बागची ने इस बात पर जोर दिया कि केशम मेघचंद्र सिंह मामले में दिए गए फैसले के अनुसार, स्पीकर को तीन महीने के भीतर फैसला लेना चाहिए था, जो अब अपने अंतिम चरण में है।
इस मामले का महत्व बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें संविधान की दसवीं अनुसूची, लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका और न्यायिक हस्तक्षेप जैसे प्रमुख संवैधानिक प्रावधान शामिल हैं। परीक्षाओं में अक्सर संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों, अनुसूचियों और न्यायपालिका की भूमिका से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनमें दसवीं अनुसूची के तहत सांसदों की अयोग्यता भी शामिल है। इसके अलावा, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा लोकसभा अध्यक्ष को दिए गए निर्देशों का उल्लेख भी परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे संविधान के पालन और न्यायिक सक्रियता के सिद्धांतों की समझ मजबूत होती है।
स्रोत: amarujala.com
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