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**जीवन-पर्यंत कारावासियों को मिलेगी सालाना 40 दिन की छुट्टी, मद्रास उच्च न्यायालय का फैसला**
मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिसमें जीवन-पर्यंत कारावासियों को सालाना 40 दिन की सामान्य छुट्टी दो किस्तों में लेने का अधिकार दिया गया है। न्यायमूर्ति अनीता सुमंथ और सुंदर मोहन की पीठ ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु जेल और सुधार सेवाएं विभाग द्वारा जीवन-पर्यंत कारावासियों को छुट्टी केवल एक बार में लेने के लिए बाध्य करना गलत है। न्यायालय ने तमिलनाडु निलंबन अधिनियम नियम, 1982 के नियम 22(2)(c) और नियम 22(3) में आए शब्द “स्पेल” (अवधि) की व्याख्या करते हुए कहा कि इसे “किस्त” के रूप में पढ़ा जाना चाहिए, ताकि कारावासियों को यह सुविधा मिल सके कि वे सालाना 40 दिन की छुट्टी दो बार में ले सकें। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि पहली किस्त शुरू होने की तारीख से एक साल के भीतर दूसरी किस्त ली जा सकती है, और अगली सालाना छुट्टी की गणना दूसरी किस्त की अंतिम तारीख से एक साल बाद होगी। यह फैसला जीवन-पर्यंत कारावासियों के मानवाधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ उनके पुनर्वास के अधिकार को भी सुनिश्चित करता है।
इस फैसले का बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष महत्व है। बैंकिंग क्षेत्र में, जहां कानूनी और प्रशासनिक मामलों की समझ आवश्यक होती है, यह फैसला प्रशासनिक कानून और कारावासियों के अधिकारों के संदर्भ में पूछा जा सकता है। एसएससी परीक्षाओं में भी, विशेषकर सीजीएल और सीएचएसएल में, न्यायपालिका के हालिया फैसलों से संबंधित प्रश्नों में इस मामले का उल्लेख किया जा सकता है। आरबीआई ग्रेड बी परीक्षा में, जहां नीति निर्माण और कानूनी ढांचे का ज्ञान परीक्षित होता है, यह फैसला प्रशासनिक सुधारों और न्यायिक सक्रियता के संदर्भ में प्रासंगिक हो सकता है। इस प्रकार, यह फैसला न केवल कानूनी जागरूकता बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के लिए भी एक महत्वपूर्ण विषय साबित होगा।
स्रोत: The Hindu
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